आज़ादी के 79 वर्षों बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से है वंचित
बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
फागूलाल रात्रे, लवन।
आज़ादी के 79 साल बाद भी अंधेरे में 21 गांव बारनवापारा के वनांचल में बिजली और सड़क का इंतजार है। आज देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सोनाखान ब्लॉक अंतर्गत बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 21 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां न बिजली है, न पक्की सड़क है। ग्रामीणों का आरोप है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी वे विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं।
बारनवापारा के घने जंगलों के बीच बसे इन 21 गांवों में सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। मोबाइल चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के काम तक ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र होने के कारण रात में जंगली जानवरों और जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। अंधेरे की वजह से कई बार हादसे और जनहानि की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।सिर्फ बिजली ही नहीं, सड़क की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आज भी खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता है। कई किलोमीटर पैदल चलकर मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली और सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जनता आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद वीर नारायण सिंह की धरती पर बसे इन गांवों को अब और उपेक्षित नहीं रखा जाना चाहिए।
वही ग्रामीणों का का कहना है बेटियाँ अब बड़ी हो चुकी है। शादी के लिए रिस्ते नही आ रहे हैं ऐसे में क्या इन बेटियों को कभी जीवन साथी मिलने दिक्कतें आ रही है, और लड़को को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रहा है।
21 गांव अंधेरे में, विकास के दावे रोशनी तलाशते
बारनवापारा के वनांचल में सड़क-बिजली का संकट डिजिटल इंडिया के दौर में बिना बिजली के जी रहे 21 गांव बीमार को खाट पर, बच्चे लालटेन में पढ़ने को मजबूर आज़ादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित वनांचल। उक्त समस्याओं की जानकारी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों के द्वारा प्रेस वार्ता रखकर दी गई। इस मौके पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
क्या कहते ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष
21 ग्रामों में बिजली एवं सड़क नहीं होने से पढ़ने वाले बच्चों को लालटेन, मिट्टी के धीरे से पढ़ाई करनी पड़ती है और सड़क नहीं होने से बीमारों को खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता है। बिजली एवं पक्की सड़क नहीं होने से शादी के उम्र के लड़के, लड़कियों को वर-
वधु नहीं मिल पा रहा है।
धरमलाल रात्रे, अध्यक्ष
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी
बारनवापारा











