बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
फागूलाल रात्रे, लवन।
ग्राम कोरदा में कोमल प्रसाद वर्मा, भाई महावीर वर्मा एवं मोरध्वज के यहां आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन 12 मार्च से चल रहा है, जिसका समापन आज कपिला तर्पण सहस्त्रधारा के साथ होगा।
कथा वाचक पंडित गौरव जोशी ने भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया। उन्होंने प्रवर्चन में कहा कि सुदामा एक दरिद्र ब्राम्हण थे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ संदीपन ऋषि के आश्रम में शिक्षा ली थी। दरिद्रता तो जैसे सुदामा की चिरसंगिनी ही थी एक टुटी हुई झोपड़ी, दो-चार पात्र और लज्जा ढकने के लिये कुछ मैले और चिथड़े वस्त्र, सुदामा की कुल इतनी ही गृहस्थी थी। दरिद्रता के कारण अपार कष्ट पाना पड़ा। पत्नि की आग्रह को स्वीकार कर कृष्ण दर्शन की लालसा मन में संजोये हुए सुदामा कई दिनों की यात्रा करके द्वारका पहुंचे। द्वारपाल के मुख से सुदामा शब्द सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण ने जैसे अपनी सुध-बूध खो दी और वह नंगे पांव ही दौड़ पड़े द्वार की ओर। दोनों बाहें फैलाकर उन्होंने सुदामा को हृदय से लगा लिया। भगवान श्रीकृष्ण सुदामा को अपने महल में ले गए। उन्होंने बचपन की प्रिय सखा को अपने पलंग पर बैठाकर उनका चरण धोया। कृष्ण के नेत्रों की वर्षा से ही मित्र के पैर धुल गये। सुदामा खाली हाथ अपने गांव की ओर लौट पड़े और मन ही मन सोचने लगे कृष्ण ने बिना कुछ दिए ही मुझे वापस आने दे दिया। सुदामा जब गांव पहुंचा तो देखा झोपड़ी के स्थान पर विशाल महल है इतने में सुदामा अकबका सा गया। कथा वाचक पंडित गौरव जोशी ने बताया कि कृष्ण ने बाताए बिना तमाम ऐश्वर्य सुदामा के घर भेज दिया। अब सुदामा जी साधारण गरीब ब्राम्हण नहीं रहे। उन्हें अनजान में ही भगवान ने उन्हें अतुल ऐश्वर्य का स्वामी बना दिया। किन्तु सुदामा ऐश्वर्य पाकर भी अनासक्त मन से भगवान के भजन में लगे रहे। गोपियों से उद्धव ने कहा गोपियों कृष्ण के नाम से रोना बंद करो। भगवान का नाम जपना शुरू करो। कथा के इस दौरान कोमल प्रसाद वर्मा, बिरज बाई वर्मा, महावीर वर्मा, बैसाखिन वर्मा, मोर ध्वज वर्मा, गुलाब बाई वर्मा, जोगेंद्र वर्मा, नन्द बाई वर्मा, रवि वर्मा, मृत्युंजय वर्मा, रज्जू वर्मा, पुरन वर्मा, नरेंद्र वर्मा, गणपत वर्समा, द्रोणाचार्य वर्मा, जयपाल वर्मा, सुलपानी वर्मा, फागुलाल रात्रे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।








