बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
फागूलाल रात्रे, लवन।
ग्राम पंचायत अहिल्दा में संस्कार सामजिक संगठन एवं ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वाधान में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन 28 मार्च से चल रहा है। इसमें क्षेत्र के भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कथा बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रीधाम चित्रकूट से पधारे कथा वाचिका देवी जया गौतम ने संगीतमय कथा वाचन कर भगवान की बाल लीलाओं के चरित्र का वर्णन किया। कथा वाचिका जया गौतम ने कथा में उपस्थित श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की। जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। कथा वाचिका ने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है, कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजा था। जहां राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान उसका वध कर देते हैं। इसी प्रकार कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं। लेकिन भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं। गोवर्धन की पूजा करने के लिए कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं। गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं। इसे देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देखकर भगवान कृष्ण कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी लोगों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। मथुरा को कंस के आतंक से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। इस मौके पर महरू राम वर्मा, रामायण वर्मा, दाऊलाल साहू, लक्ष्मीनारायण वैष्णव, हेमलाल साहू, जगमोहन साहू ,कृष्णकुमार, कोमल, समारू, फ़िरतराम, भरत, प्रहलाद, मिलूसाहु, जीवन साहू एवं आयोजक समिति का सदस्यों में छबि राम साहू, मैधुराम, नरेश, ओमप्रकाश, महेश, घनश्याम मुकेश, मेष कुमार, विजय यादव, रतनलाल। राजकपूर, शिव साहू, मूलचंद, चंद्रविजय, अरुणकुमार, गिरीश, हेमलाल। कमलेश, रामेश्वर, अनिल, गजकुमार, द्वारिका, रामायण, जोगेश, डोलाराम, राजेश, गोपीचंद, पुसरंजन, छन्नू, गोविन्दजान, जितेंद्र, रामकुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।










