बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
फागूलाल रात्रे, लवन।
ग्राम कोरदा में कोमल प्रसाद वर्मा, भाई महावीर वर्मा एवं मोरध्वज के यहां आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन चल रहा है।
मंगलवार को कथा वाचक पंडित गौरव जोशी ने
महारासलीला व रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। कथावाचक जोशी ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया। इस सात दिवसीय भागवत कथा का सफल संचालन के लिए आयोजक जोगेंद्र वर्मा और उनका परिवार व उनके सहयोगियों का सराहनीय योगदान मिल रहा।
कथा के इस दौरान कोमल प्रसाद वर्मा, बिरज बाई वर्मा, महावीर वर्मा, बैसाखिन वर्मा, मोर ध्वज वर्मा, गुलाब बाई वर्मा, जोगेंद्र वर्मा, नन्द बाई वर्मा, रवि वर्मा, मृत्युंजय वर्मा, रज्जू वर्मा, पुरन वर्मा, नरेंद्र वर्मा, गणपत वर्समा, द्रोणाचार्य वर्मा, जयपाल वर्मा, सुलपानी वर्मा, फागुलाल रात्रे, पवन वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।








