अध्यात्म और समाज सुधार का अनूठा संगम; देहदान, रक्तदान और दहेज मुक्त विवाहों ने पेश की समाज के सामने नई मिसाल
बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
फागूलाल रात्रे, लवन।
जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम भवन में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज के पावन सानिध्य में एक दिवसीय ‘विशाल सत्संग एवं समाज सुधार समारोह’ का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न कोनों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया। संत रामपाल महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर भक्तों ने मानवता की सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर आयोजित विशेष चिकित्सा शिविर में 26 श्रद्धालुओं ने स्वैच्छिक रक्तदान किया, जो स्थानीय अस्पतालों में जरूरतमंदों की सहायता हेतु भेजा जाएगा। वहीं, 73 श्रद्धालुओं ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प पत्र भरा। भक्तों का मानना है कि संत के ज्ञान के अनुसार, मृत्यु के पश्चात भी यदि यह शरीर चिकित्सा विज्ञान के काम आ सके, तो यह जीवन की सार्थकता है। दहेज मुक्त ‘रमैनी’ विवाह: फिजूलखर्ची पर प्रहार समाज में फैली दहेज की कुरीति को जड़ से मिटाने के संकल्प के साथ, सत्संग के दौरान 3 जोड़ों का आदर्श विवाह संपन्न कराया गया। यह विवाह ‘रमैनी’ पद्धति से हुआ, जिसमें बिना किसी बैंड-बाजे, दहेज या दिखावे के, मात्र 17 मिनट के गुरुवाणी पाठ के साथ वर-वधु एक-दूसरे के जीवनसाथी बने। उपस्थित जनसमूह ने इस सादगीपूर्ण विवाह की मुक्त कंठ से सराहना की।
‘कोई भी भूखा न सोए’ के संकल्प के साथ संत जी द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का प्रभाव यहाँ स्पष्ट दिखाई दिया। पूरे दिन चले इस भव्य आयोजन में हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं और आम जनता के लिए निःशुल्क विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी। सेवादारों ने पूरी निष्ठा के साथ अनुशासन बनाए रखते हुए सभी को प्रेमपूर्वक शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करवाया। सत्संग के दौरान संत के प्रतिनिधि ने उनके आध्यात्मिक ज्ञान को साझा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में मानव समाज को पाखंडवाद और व्यसनों ने जकड़ रखा है। नशा मुक्त समाज: युवाओं को शराब, बीड़ी, सिगरेट जैसे जानलेवा व्यसनों से मुक्त करना। समाज को रिश्वतखोरी और फिजूलखर्ची से बचाकर एक नैतिक राष्ट्र का निर्माण करना। शास्त्रानुकूल भक्ति: पवित्र वेदों, गीता, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब के आधार पर सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाना।









